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कार्बन टैक्स के स्वीकार कइल में एहि के डिजाइन आ प्रस्तुति कइल तरीका इतने महत्वपूर्ण काहे?
जलवायु परिवर्तन से लड़ल में अक्सर कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन पर टैक्स लगावल जाला। लेकिन एहि उपाय के लागू कइल में जनता के सहमति बहुत महत्वपूर्ण भा। एक ताजा विश्लेषण से पता चलल बा कि एहि स्वीकारता एहि बात पर बहुत निर्भर करला कि टैक्स के डिजाइन कइल गेल बा आ लोगन से कइसे पूछल जाला।
नतीजा से पता चलल बा कि सीधे सवाल, जैसे कि स्वीकार्य रकम के बारे में पूछल जाला, तो स्वीकारता कम मिलला, लेकिन जब विकल्प आधारित तरीका अपनावल जाला, जैसे कि टैक्स के पैसा सार्वजनिक परिवहन या परिवारन के लिए वापस कइल जाला, तो लोग ज्यादा स्वीकार करले। दूसरी ओर, अगर टैक्स के पैसा के इस्तेमाल के बारे में स्पष्टता ना होखे, तो लोग एहि से असहमत होखेला।
एक और महत्वपूर्ण बात एह बा कि लोगन के पसंदीदा रकम आ अधिकतम स्वीकार्य रकम में बहुत अंतर होखेला। लोग औसतन उह रकम चुनले जो एगोदम कम होखेला जो ओ लोग सहन कर सकले, अगर ओनकरा पर्यावरणीय फायदा आ मुआवजा के बारे में समझावल जाला। एह से पता चलला कि जानकारी आ पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभावेला।
टैक्स के पैसा के पुनर्वितरण, जैसे कि सब्सिडी या पर्यावरणीय परियोजना में निवेश, स्वीकारता बढ़ावे में बहुत मदद करला। लेकिन अगर टैक्स को बस एक अतिरिक्त बोझ समझल जाला,pecially गरीब परिवार आ जलवायु मुद्दा से अनजान लोग एहि का विरोध करले।
एह observation से पता चलला कि जलवायु नीति के डिजाइन में सावधानी बरतल जरूरी बा। निर्णयकर्ता के चाही कि ओ सिर्फ मौजूदा अध्ययन पर निर्भर ना रहे, क्योंकि विधि में अंतर नतीजा को गलत कर सकला। स्थानीय संदर्भ के अनुसार सर्वेक्षण, स्पष्ट सवाल आ धन के पुनर्वितरण के विकल्प स्वीकारता में बड़ा अंतर ला सकला।
अंत में, लोगन के पसंद स्थिर ना होखे। कुछ लोग एगोदम ज्यादा टैक्स स्वीकार कर सकले, अगर ओनकरा फायदा समझावल जाला। एह से अधिक महत्त्वाकांक्षी नीति के रास्ता खुलल बा, बशर्ते कि ओनकरा समझाके आ जनता के अपेक्षा के ध्यान में रखल जाव।
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Nos références
Travail de référence
DOI : https://doi.org/10.1007/s10018-026-00467-6
Titre : Impact of policy design and elicitation method on carbon tax acceptability
Revue : Environmental Economics and Policy Studies
Éditeur : Springer Science and Business Media LLC
Auteurs : Felix F. Mölk; Gottfried Tappeiner; Janette Walde